Vichar

Just another weblog

51 Posts

1697 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2472 postid : 104

दर्द कभी बेजुबां नहीं होता

Posted On: 25 Mar, 2011 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

दर्द कभी बेजुबां नहीं होता
अनकही दास्ताँ नहीं होता
अश्क जब बेतरह छलकते हैं
क्या अफसाना बयां नहीं होता ?
मुस्कराके यूँ गम छिपाना क्या;
खुशनुमा गीत गुनगुनाना क्या !
दिल की गहराई में दफ़न होकर,
कोई जज्बा फ़ना नहीं होता
लौ उम्मीदों की थरथराती है
आरज़ू है- मचल ही जाती है
ऐसे ख्वाबों को पंख मत देना-
जिनका कोई आसमां नहीं होता
उनकी कातिल अदा को क्या कहिये
दोस्ती और जफा को क्या कहिये!
लब पे ठहरे हुए पयामों का
उनको कुछ भी गुमां नहीं होता
हमको संगदिल बुलाने वाले सुन
आँख हमसे चुराने वाले सुन
ज़िन्दगी तब भी साथ चलती है
जब कोई रहनुमा नहीं होता

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 3.80 out of 5)
Loading ... Loading ...

45 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Dany के द्वारा
October 17, 2016

Wow, wirklich wunrcdsehöne Fotos. Auch wenn ich das Outfit so vermutlich nicht tragen würde, steht es dir ganz wunderbar. & ich liebe deinen Pony – der bringt dein Gesicht zur Geltung & das kann sich wirklich mehr als sehen lassen Vielen Dank auch für deinen lieben Kommentar. Ich hab mich sehr gefreut, weil die Söckchen ein totaler Spontankauf waren & das ganze ein kleines Experiment mit den Boots ♥

Pawan Maddheshiya के द्वारा
October 19, 2014

आपकी इस गजल ने तो महफ़िल में उमंग पैदा कर दिया जब मैंने अपने दोस्तों को इसको सुनाया तो वे लोग भी आपकी बहुत तारीफ कर रहे थे. हमारी एक विनती है अगर आप और कोई रचना लिखे तो हमें जरूर पोस्ट करे धन्यवाद

    vinitashukla के द्वारा
    January 9, 2015

    हौसलाफजाई के लिए शुक्रिया.

संदीप कौशिक के द्वारा
April 23, 2011

विनीता जी, मुझे शब्द नहीं मिल रहे यहाँ लिखने के लिए ताकि मैं आपकी इस रचना के बारे में कुछ कह या लिख सकूँ | इस ज़िंदा-दिल रचना के लिए आपको कोटि-कोटि बधाई ||

    vinita shukla के द्वारा
    April 23, 2011

    बहुत धन्यवाद संदीप जी, रचना को सराहने के लिए.

brajmohan sharad के द्वारा
March 28, 2011

आ० विनीता जी ऐसे ख़्वाबों को पंख मत देना …….बहुत अछि ग़ज़ल …..बधाई .. साथ ही ** उन्माद नहीं ! ये खेल है प्यारे** ब्लॉग पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद … ब्रजमोहन श्रीवास्तव

    vinitashukla के द्वारा
    April 1, 2011

    बहुत धन्यवाद ब्रजमोहन जी.

kmmishra के द्वारा
March 26, 2011

नमस्कार, बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ हैं ये. विनीता जी आभारी हूँ आपका.

    vinitashukla के द्वारा
    March 26, 2011

    इस प्रोत्साहन भरी प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद.

abodhbaalak के द्वारा
March 26, 2011

विनीता जी दिल को छु लेने वाली ग़ज़ल…. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    vinita shukla के द्वारा
    March 26, 2011

    आपका बहुत आभार.

rachna varma के द्वारा
March 26, 2011

आदरणीय विनीता जी , बहुत अच्छे उदगार, इस बेहतरीन कविता के लिए ढेर सारी बधाइयाँ

    vinitashukla के द्वारा
    March 26, 2011

    मनोबल बढ़ाने के लिए बहुत धन्यवाद रचना जी .

    Chintu Bhatt के द्वारा
    April 12, 2011

    Bahut bahut MUbarak ho \"VInita Jee\" Thanks Chintu Bhatt

    vinitashukla के द्वारा
    April 12, 2011

    धन्यवाद भट्ट जी.

Harish Bhatt के द्वारा
March 26, 2011

आदरणीय विनीता जी सादर प्रणाम, बहुत ही अच्छी dil ko chhu jaane वाली कविता का लिए हार्दिक बधाई. 

    vinitashukla के द्वारा
    March 26, 2011

    अभिवादन हरीश जी. सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए आभार.

sanjay kumar tiwari के द्वारा
March 26, 2011

prarambha se ant tak sunder sabdo va bhavo se saji krati …..

    vinitashukla के द्वारा
    March 26, 2011

    संजय जी, हौसला बढ़ाने के लिए शुक्रिया.

Rajkamal Sharma के द्वारा
March 25, 2011

विनीता जी …..नमस्कार ! यह कविता मेरे मतलब की है क्योंकि इसमें आग के साथ -२ धुआं भी है ….. बधाई

    vinita shukla के द्वारा
    March 25, 2011

    नमस्कार राजकमल जी. रचना को पढ़ने और सराहने के लिए धन्यवाद.

surendrashuklabhramar के द्वारा
March 25, 2011

लौ उम्मीदों की थरथराती है आरजू है -मचल ही जाती है ऐसे ख्वाबों को पंख मत देना- जिनका कोई आसमां नहीं होता विनीता जी मुबारक हो इस सुन्दर रचना के लिए गजब के भाव -दिल को छू लेने वाली कविता -लौ उम्मीदों की थरथराती है -वाह वाह – सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५

    vinita shukla के द्वारा
    March 25, 2011

    आपकी उत्साह भरी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ.

amita के द्वारा
March 25, 2011

भावों व शब्दो का सुंदर मेल .बहुत-2 बधाई………

    vinita shukla के द्वारा
    March 25, 2011

    हौसला बढ़ाने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.

Alka Gupta के द्वारा
March 25, 2011

विनीता जी , हृदय के गहन भावों को बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति दी है ! बढ़िया रचना के लिए बधाई 1

    vinita shukla के द्वारा
    March 25, 2011

    बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद अलका जी.

neelamsingh के द्वारा
March 25, 2011

बधाई हो विनीता जी !बहुत ही मार्मिक और हृदयस्पर्शी रचना है | वाकई दर्द की जुबां नहीं होती फिर भी उसकी ख़ामोशी बहुत कुछ कह जाती है |

    vinita shukla के द्वारा
    March 25, 2011

    उत्साह बढ़ाने वाली प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक आभार नीलम जी.

Ramesh Bajpai के द्वारा
March 25, 2011

ऐसे ख्वाबों को पंख मत देना- जिनका कोई आसमां नहीं होता आदरणीय विनीता जी कितनी गहराई से बहे है ये जज्बात | बहुत बहुत बधाई | ५\५

    vinita shukla के द्वारा
    March 25, 2011

    उत्साह बढ़ाने के लिए आपका धन्यवाद माननीय रमेश जी .

div81 के द्वारा
March 25, 2011

बहुत अच्छी और भावपूर्ण रचना ……..बधाई

    vinita shukla के द्वारा
    March 25, 2011

    सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद दिव्या जी .

Deepak Sahu के द्वारा
March 25, 2011

अत्यंत ही सुंदर रचना विनता जी! बधाई

    vinita shukla के द्वारा
    March 25, 2011

    प्रोत्साहन के लिए आभार दीपक जी.

March 25, 2011

आँख हमसे चुराने वाले सुन हमको संगदिल बुलाने वाले सुन आग जो खुद लगाये जाते हो ये न कहना, धुआं नहीं होता विनीता जी बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण रचना.

    vinita shukla के द्वारा
    March 25, 2011

    हौसला अफजाई का शुक्रिया.

आर.एन. शाही के द्वारा
March 25, 2011

शायरी और कविताओं में एक जैसी उत्कृष्टता । बधाई विनीता जी ।

    vinita shukla के द्वारा
    March 25, 2011

    उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद शाही जी.

baijnathpandey के द्वारा
March 25, 2011

आदरणीया विनीता जी दर्द कभी बेजुबां नहीं होता अनकही दास्ताँ नहीं होता अश्क जब बेतरह छलकते हैं- तो अफसाना बयां नहीं होता ? ……..बड़ा हीं सजीव चित्रण प्रस्तुत किया है आपने दर्द का …..अंतस की व्यथा की बड़ी गहरी विवेचना की है धन्यवाद |

    vinitashukla के द्वारा
    March 25, 2011

    बहुत धन्यवाद आपका बैजनाथ जी.


topic of the week



latest from jagran