Hindi Blogs, Best Indian Blog

Vichar

Just another weblog

34 Posts

1,007 comments

vinitashukla


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

उसको तो जाना ही था ………..

Posted On: 19 Feb, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

कविता में

44 Comments

यह जाने पहचाने से अजनबी…..

Posted On: 19 Jan, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 3.80 out of 5)
Loading ... Loading ...

कविता में

44 Comments

हम दोनों……

Posted On: 10 Jan, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.67 out of 5)
Loading ... Loading ...

कविता में

40 Comments

जीवन की संध्या में…

Posted On: 24 Dec, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

जनरल डब्बा में

30 Comments

एक नारी हो तुम…….

Posted On: 2 Dec, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

कविता में

42 Comments

लहरें तो लहरें हैं

Posted On: 24 Nov, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 3.33 out of 5)
Loading ... Loading ...

कविता में

39 Comments

बचपन क्यों खो जाता है?

Posted On: 14 Nov, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

कविता में

32 Comments

जीवन का गणित

Posted On: 2 Nov, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 3.75 out of 5)
Loading ... Loading ...

कविता में

45 Comments

तुम्हें हारना और नहीं है !

Posted On: 25 Oct, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.33 out of 5)
Loading ... Loading ...

कविता में

37 Comments

सब दिशाएं मौन हैं………..

Posted On: 2 Oct, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.67 out of 5)
Loading ... Loading ...

कविता में

43 Comments

Page 1 of 41234»

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: sonam

के द्वारा: akraktale

निर्धन समाज पार्टी का घोस्णा पत्र पन्जिक्रित करेन्सी सन्सार से निर्धनन्ता, भ्रिस्टाचार, अपराध तथा आलस्य का जड से विनाश करने का एक मूल मन्त्र है! ईससे सम्पूर्ण सन्सार का विकास होगा . लेकिन ईसे दुनिया के समस्त देशौ को स्वीकार करना पडेगा तथा पन्जिक्रित पुन्जी को परिचलन मे लाना पडेगा तभी भुख्मरी, गरीबी,भ्रिसटाचार, अपराध व आलश्य से छुट्कारा पाया जा सकता है. लोकपाल, लोकायुक्त या कडे से भी कडा कानून पुरी तरह से समाज से करप्शन व क्राईम को समाप्त नही कर सकता. ईसे रोकने हेतु दुनिया के किसि न किसि देश को आगे आ कर पन्जिक्रित पुन्जी के परिचालन को शुरू करना पडेगा. करन्शी का परिवर्तित रुप " नोट कि जगह पर बॆक से जारी की गयी करन्सी पर खाता धारक नाम व नम्बर को लिख कर ्नोट के मात्र सन्चालन के द्वारा करप्शन व अपराध से एक साथ छुट्कारा मिल जायेगा. १९९३ मे उत्तर प्रदेश मे जन्मी निर्धन समाज पाट्री ने सभी प्रान्तौ मे होने वाले लोकसभा चुनाव मे अपने प्रत्यासी उतारने का निर्णय लिया है. सरकार बनते ही देश से रुपये के परिचलन को निरस्त कर रजिस्टर्ड करन्सी लागू करेगी. काला धन के वापस लाने वालो पर कोयी मुकदमा नही चलेगा और ना हि कोयी टैक्स वसूला जयेगा. पार्टी ने घोस्णा पत्र मे पन्जिक्रित पुन्जी के प्रचलन को सरकार बनते ही लागू करने का वादा किया तथा वर्तमान मे चल रहे रुपये को बन्द कर बैन्क के द्वारा सीधे खाता धारक के डीमन्ड के अनुसार करन्सी जारी कर देश से करपशन व अपराध मुक्त शासन की स्थापना करने का निर्णय लिया है. पार्टी के रास्ट्रीय कैम कार्यालय ईलिस बाजार, कानपुर महानागर, उत्तर प्रदेश मे पार्टी के रास्ट्रीय पमूख ईकवाल सिद्दीकी उप्स्थिति मे पार्टी की रास्ट्रीय समिति के समस्त सदस्यॊ ने एक स्वर मे पार्टी के घोसणा पत्र जारी कर विधान सभा के चुनाव मे पाचो प्रान्तो मे प्रत्यासी उतारने का निर्णय लेते हुऎ महारास्ट्र के सन्योजक श्री उदय बागणे, उत्तराखण्ड के श्री य़शवन्त सिन्ह नेगी, झारखन्ड के श्री नीरज कछवाहा, ऒडिसा के श्री आनिरुध्द स्वाई, आन्ध्र प्रदेश के डा. नरेन्द्र भल्ला व लकछमन राव को प्रदेश स्तर पर समितिया’ बनाने का निर्धेस दिया. रूपया समाज मे ब्याप्त समस्त बिमारियो का कारण है. रूपये के रूप को परिवर्तित कर समाज मे अराजकता, भ्रिस्टाचा्री, भय, चोरी, डकैती, लूट व आलस्य को जड से मिटाया जायेगा. युरो, डालर, पोण्ड्स, लीरा, दिनार, टका, येन आदि के रूप को भी बदल जाने से समस्त विश्व को ईन बिमारियो को निजात दिलाया जा सकता. निर्धन समाज पाट्री के एक सुत्रीय मुद्दे को सन्सार मे अन्तर रास्ट्रीय पहिचान मिल रही है. वीरेन्द्र तोमर, रास्ट्रीय महा सचिव ३७/४२, गिलिश बज़ार, कानपुर निर्धन समाज पार्टी, उत्तर प्रदेश, भारत, E-mail: nirdhansamajparty@gmail.com, ========================================================================================= NIRDHAN SAMAJ PARTY FOR REGISTERED CURRENCY Fatehpur Sikari MLA Condidate : Dheer Singh Sikarwar ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ NIRDHAN SAMAJ PARTY Agenda : REGISTERED CURRENCY Fatehpur Sikari MLA Condidate : Dheer Singh Sikarwar --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- NIRDHAN SAMAJ PARTY Agenda : REGISTERED CURRENCY Fatehpur Sikari MLA Condidate : Dheer Singh Sikarwar -----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------इकवाल सिद्दिकी- जिन्दावाद, (NSP) अन्ना हजारे - जिन्दाबाद निर्धन समाज पार्टी के फ़तेहपुर (सीकरी) विधान सभा छेत्र के युवा उम्मीवार धीर सिह सिकरवार (रुनकता वाले) निवेदक:- वीरेन्द्र तोमर - रास्ट्रीय महासचिव ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ NIRDHAN SAMAJ PARTY FOR REGISTERED CURRENCY NSP का नारा है, सारा देश हमारा ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- (NSP) रजिसटर्ड करेन्सी लाना है, भ्रिस्टाचार मिटाना है, ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- (NSP) देश की जनता शर्मिन्दा है, भ्रिस्टाचारी जिन्दा है. ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- (NSP) NSP LAVO, DESH BACHAVO. ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- TAX KATEGA KHATE SE, DESH BACHEGA GHAATE SE. ======================================================================================= CHOREE-DAKAITEE-LOOT KA NAAM DESH SE HOGA GUMNAAM ======================================================================================= JANATAA NE AB JANA HAI, NSP KO LANA HAI. ======================================================================================= KARJ SE MILEGEE CHHUTEE, REGISTERED CURRENCY SE HOHEE MUKTI ========================================================================================= REGISTERED-CURRENCY KAM KAREGEE BHRISTAACHAR KA NASH KAREGEE. ========================================================================================= REGISTERED CURRENCY KO JANO BHAIYYA CHEQUE,DD KEE TARAH RUPAIYA ========================================================================================== REGISTERED CURRENCY AANDHEE HAI ANNA DESH KA GANDHEE HAI DUNIYA MEIN PARIVARTAN AAYEGA, CURRUPTION-CRIME MIT JAYEGA. ========================================================================================= NSP NAHEE YE JANTA HAI PUREE DUNIYA KA YE MUDDA HAI. ========================================================================================== DESH KI JANTA NIRDHAN HAI DHAN HEE ESKA KARAN HAI. ========================================================================================= NSP SARKAR BANAYEGEE-GAREEBEE MIT JAYEGEE. ======================================================================================== BINA AGENDA LADATE HAI JANTA KO YE TAGATE HAI ======================================================================================= NSP SE HOGA KALYAAN, DESH BANEGA VISHWA MAHAN ========================================================================================== JANTA NE AB THANA HAI, REGISTERED CURRENCY LAANA HAI, ========================================================================================== REGISTERED CURRENCY HEERA HAI, PAISA DESH MEIN RISTA HAI.

के द्वारा: NIRDHAN SAMAJ PARTY

के द्वारा: manoranjan thakur

अद्भुत, अनुपम, अद्वितीय..आदरणीय विनीता जी| मोबाइल पर आपकी कविता पढ़ी...अपनी कविता पर आये टिप्पणियों को कल संबोधित करूँगा किन्तु आज मैं अपने आपको रोक नहीं पाया|क्या बात है, इधर मैंने कवियों को लक्ष्य कर ''कविताओं से डर लगता है'' लिखा और उधर आपने कविता के प्रति मेरे प्रेम को पुनः जागृत कर दिया|सामाजिक सरोकारों से शून्य होती कविता के लिए उधर मुझे कठोरतम शब्दों का प्रयोग करना पड़ा और इधर आपने सामाजिक वेदना की मुखर अभिव्यक्ति कर दी| जुल्म होता देख भीतर कुछ सुलगता ही नहीं ; सुगबुगातीं थीं जो- वे संवेदनाएं मौन हैं| नमन हैं इन पंक्तियों को ही नहीं, सम्पूर्ण कविता को नमन है|जय भारत, जय भारती

के द्वारा: atharvavedamanoj

के द्वारा: Lahar

के द्वारा: Ramesh Bajpai

के द्वारा: Vinita Shukla

के द्वारा: Vinita Shukla

के द्वारा: Vinita Shukla

के द्वारा: Vinita Shukla

के द्वारा: Vinita Shukla

रचना जी, आपने इस पर इतना मनन किया धन्यवाद. एक बार अपराधी का ठप्पा लगने पर समाज में व्यक्ति को किस नज़र से देखा जाता है , यह बताने की जरूरत नहीं. आतंकवादी किसके आगे समर्पण करेंगे? उस सरकार के आगे, जिसकी अपनी ही नीतियाँ निर्धारित नहीं! जो सिर्फ वोट की राजनीति और तुष्टिकरण की नीति पर चलती आयी है. क्या उस सरकार में में इतनी कुब्बत है कि इनको संरक्षण दे सकें और इनके पुनर्वास के लिए सही कदम उठा सकें? यदि ऐसा होता तो आतंकवाद पनपने ही क्यों पाता? इनका सरकार और व्यवस्था से भरोसा उठ गया था, तभी तो ये गलत राह पर चलने लगे. वैसे भी माफिया की भांति ही आतंकवाद का network इतना तगड़ा है कि एक बार फंस जाने पर उससे निकल पाना सहज नहीं. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया.

के द्वारा: vinita shukla

के द्वारा: vinita shukla

के द्वारा: Chintu Bhatt

के द्वारा: vinita shukla

के द्वारा: vinita shukla

के द्वारा: vinita shukla

के द्वारा: vinita shukla

के द्वारा: sanjay kumar tiwari

के द्वारा: vinita shukla

के द्वारा: K M Mishra

के द्वारा: vinita shukla

के द्वारा: vinita shukla

के द्वारा: vinita shukla

के द्वारा: vinita shukla

के द्वारा: subhash

के द्वारा: Nikhil

के द्वारा: vinita shukla

के द्वारा: आर.एन. शाही

मैम, सबसे पहले तो इस खूबसूरत सी रचना के लिए आपका धन्यवाद. क्या सही में आपको लगता है की हमारी बहनों और बेटियों को बैसाखी की ज़रुरत नहीं है??? ये सवाल ख़ास कर आप से, क्यों की आप भी औरत है. अगर आप का उत्तर हाँ है तो. फिर क्यों जब-तब महिला आरक्षण की बात उठती है (क्यों हर जगह वो अपने लिए आरक्षण चाहते हैं???) क्यों वो खुद समाज की भूखी नज़रों से बचने के लिए किसी भी अनजान व्यक्ति को भाई कहने से नहीं झिझकती है??? क्यों हर मुस्किल मोड़ पे वो खुद को ये कहते हुए हटा लेती है की वो तो लड़की है. वो ये कैसे कर सकती है, और क्यों हर उस जगह (जहाँ कुछ पाने की उम्मीद हो) ये कह के आगे हो जाती है की लेडीज फर्स्ट ???? सॉरी अगर आपकी भावनाए आह़त हुई हो तो. मगर यहाँ भी वो ये भूल जाती है की लड़कों में भी भावनाएं होती है, ये सिर्फ लड़कियों के जग्गेर नहीं . . . अगर सही में हर लड़की चाहती है की उसे बैसाखियों की ज़रुरत नहीं तो इसकी पहल उसे खुद, पहले अपने से लड़कर करनी होगी. वो तभी लड़कों से कंधे से कन्धा मिलकर चल सकती है जब खुद लड़का बन्ने की हिमात रखती हो. पुनः आपसे माफ़ी चाहूँगा .. .

के द्वारा: Prakash singh Kharayat

विनीता जी देर से पढ़ा ये लेख. जो दिख रहा है आपने लिख दिया जो हो रहा है समझा दिया पर जो लोग अपनी अपनी सुविधा के अनुसार प्रेम के नाम का इस्तेमाल कर रहे है वे प्रेम के पर्याय नहीं बन सकते जैसे पेन के विज्ञापन के साथ नारी की अर्धनगन तस्वीर से पेन के गुण अथवा पेन की विशेषताए प्रभावित नहीं हो जाती. प्रभावित होता है तो केवल अपना चरित्र, नजरिया और सोच. प्रेम भी इसी तरह अपने गुण या विशेषताएं नहीं बदलता है. प्रेम नहीं बदल रहा बल्कि समय के साथ हमारा नजरिया बदल रहा है प्रेम अभी भी वैसा है जैसा कि एक मासूम के दिल में रहता है. चाहियेगा तो मेरे नज़रिए को 'कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे........' शीर्षक के अंतर्गत देखिएगा. क्षमा सहित.

के द्वारा: Rahul

औरत की पीड़ा की अभिवयक्ति के लिए शब्दों एवं दृष्टान्तो के बेहतरीन चुनाव के लिए ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं. मगर सोचना ये है कि इन अद्रश्य अनुबंधों से छूटने की ललक, साहस और चाहत कितनी औरतो में हैं क्यों की इस सच को भी नकारा नहीं जा सकता की औरत की सबसे बड़ी दुश्मन औरत ही होती है. पहले औरतो की सोच बदलनी होगी की वे पुरुष प्रधान समाज का अंग है बल्कि सोचे कि वे बल (power) प्रधान समाज का अंग है और उन्हें भी पॉवर प्राप्त करनी होगी और वो भी लड़ कर, न कि भीख मांग कर क्योंकि यह हक उन्हें पुरुषो से नहीं मिलेगा बल्कि अपने बलबूते पर हासिल करना होगा और औरतो में एका होना भी जरुरी है. सास, बहु, नन्द, देवरानी, जिठानी, सौतन जैसे विरोधी ग्रुपों के बनने से बचना होगा.

के द्वारा: Rahul

के द्वारा: vinita shukla

के द्वारा: Abhishek

के द्वारा: rita singh \'sarjana\'

के द्वारा: Amit Dehati

के द्वारा: Piyush Pant, Haldwani

आदरणीय विनीता जी , मैं आपकी बातो से कुछ कुछ सहमत हूँ लेकिन आपने अपनी मर्यादाओं को थोडा सा डिगा दिया है ..............................इसके लिए मुझे आपत्ति है ........ अब मुद्दे की बात करते है \"त्रिया चरित्र\" को लिखने में कोई ब्याक्तिगत स्वार्थ नहीं है | विनीता जी इस धरातल पर जो भी विराजमान है सभी को स्वार्थ ने जकड रक्खा है ...................बात अपने फायदे की हो तो सब ठीक है ........और अपने को नुकसान हो रहा है तो गलत ..............इकोनोमिक्स में मैंने पढ़ा .......एक की प्रोफिट दुसरे का नुकसान है .............| जैसे - यही बात हम मर्दों को कहते हुए अच्छा महसूस होता है जबकि आपके सम्मान आहत होता है . आपको बुरा लगता है ............... हम सभी श्रृष्टि के मनुष्य किताबो का अनुसरण करते है , और मुझे लगता है की जो विद्वानों ने कहा है सही कहा उसमे कोई संदेह नहीं | आज एक छोटा सा अविष्कार लोग करते है तो उसके लिए उन्हें पुख्ता सबूत दिखाना पड़ता है मुझे लगता है की ये नियम पहले से ही चला आ रहा है | इस वाक्य को प्रस्तुत करने से पहले कई विद्वानों की सहमती ली गई होगी | आज रोज मर्रा की जिंदगी में नारियों के कृत्या कुछ ऐसा देखने को अक्सर मिल जाता जो खुद को सर्मिन्दा कर देता ........और औरतों की गंदे कृत्य पर मुह से यूँ ही निकल पड़ता है ......................त्रिया चरित्रं दैबों न जानम......... मैं ये नहीं कहता की हम मर्द बील्कुल दूध के धुले है ...............] बुरा लगा हो तो माफ़ी चाहूँगा ! धन्यबाद ! http://amitdehati.jagranjunction.com

के द्वारा: Amit Dehati

''त्रिया चरित्रं पुरुषस्‍य भाग्‍यं, दैवो न जानाति कुतो मनुष्‍य:'- निस्‍संदेह इसे लिखने और सदियों से वागास्‍त्र के रूप में टांग कर घूमने वाला पुरुष ही रहा है। यह उक्ति दो बातें दर्शाती है- पुरुष की संकुचित स्‍वार्थी सोच अपनी सुविधा के लिए स्‍त्री के केवल चरित्र को महत्‍व देती है और अपने लिए भाग्‍य को। स्‍त्री के हिस्‍से में मानों विधाता ने भाग्‍य लिखा ही नहीं और पुरुष के लिए चरित्र निरर्थक है। वह निकम्‍मा-निर्धन भी है तो कोई बात नहीं। जाने कब भाग्‍योदय हो जाए। इससे भी वह स्‍त्री पर प्रभुता दिखाना चाहता है। स्‍त्री का भाग्‍य तो उसी से बंधा है। एक लंबे समय तक और काफी हद तक आज भी पुरुष के एक वर्ग की मानसिकता स्‍त्री को गाय-बकरी की तरह सम्‍पत्ति-धन ही मानती रही है और मानती है। स्‍त्री धन, कन्‍या धन जैसों शब्‍दों से भी यही ध्‍वनि निकलती है। सम्‍पति सुविधा-उपभोग के लिए होती है। सामान्‍यत: ब्‍यक्ति किसी को दबाये रख कर , अनुचर-अनुचरी बना कर सुख महशूस करता है। यह उक्ति उसी मानसिकता की निदर्शक है।  यह अच्‍छी और संतोष की बात है कि ऐसी बात गीता या रामायण में नहीं है।

के द्वारा: sdvajpayee

विनिता जी, वक्त के साथ-साथ,पुरानी मान्यतायें भी बदलती हॆं.आपने स्वयं लिखा कि-’ अपनी बात मनवाने के लिए यदि वह त्रिया हठ का सहारा ले तो अचरच कैसा ? पहले के हिसाब से यह उस समय की मानसिक कुंठाओं के कारण था.आज तो नारी न केवल पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हॆ ब्लकि कहना चाहिए-आगे निकल रही हॆ.वक्त के हिसाब से पुरुष ने भी अपने आप को काफी हद तक बदला हॆ.मॆं तो कहूंगा बदलना भी चाहिए.स्त्री --पुरुष में कोई होड नहीं होनी चाहिए.समाज रुपी रथ के दोनों ही पहियें हॆं,दोनों का अपना महत्व , दोनों जब तक आपस में सामंजस्य स्थापित नहीं करेंगें,रथ आगे नहीं बढ सकता. यह बात लोगों को जितनी जल्दी समझ में आ जाये,उतना ही समाज के हित में हॆ.दु:ख तो इस बात का हॆ कि आज भी नारी के विकास में बाधा पुरुष की ओर से इतनी नहीं,जितनी एक स्त्री की ओर से ही हॆ



  • ज्यादा चर्चित
  • ज्यादा पठित
  • अधि मूल्यित

अन्य टैग